
सक्कं हविज्ज दट्ठुं विज्जुज्जोएण रूवमच्छिम्मि ।
ण य महिलाए चित्तं सक्का अदिचंचलं णादुं॥973॥
बिजली प्रकाश में चक्षु स्थित रूप देखना सम्भव है ।
किन्तु स्त्रियों का चंचल चित जानें सदा असम्भव है॥973॥
अन्वयार्थ : अपने नेत्रों का रूप भी देखने में समर्थ हो जाते हैं; परन्तु स्त्री का अति चंचल चित्त जानने में कोई समर्थ नहीं होता ।
सदासुखदासजी