+ किस-किस प्रकार से पुरुष का चित्त हरती है, यह कहते हैं- -
अलिएहिं हसियवयणेहिं अलियरुयणेहिं अलियसवहेहिं ।
पुरिसस्स चलं चित्तं हरंति कवडाओ महिलाओ॥975॥
झूठे हास्य वचन से और रुदन से झूठी शपथों से ।
पुरुषों के चंचल चित को कपटी नारी इस तरह हरें॥975॥

  सदासुखदासजी