तारिसओ णत्थि अरी णरस्स अण्णोत्ति उच्चदे णारी ।
पुरिसं सदा पमत्तं कुणदित्ति य उच्चदे पमदा॥984॥
नर का एेसा अन्य नहीं अरि, अतः कहें उसको नारी ।
नर को सदा प्रमत्त करे वह प्रमदा इससे कहलाती॥984॥
अन्वयार्थ : मनुष्य के स्त्री समान अरि/बैरी और कोई नहीं है, इससे इसे नारी कहते हैं और पुरुष को प्रमादी करती है, इस कारण इसे प्रमदा कहते हैं ।

  सदासुखदासजी