
गलए लायदि पुरिसस्स अणत्थं जेण तेण विलया सा ।
जोजेदि णरं दुक्खेण तेण जुवदी य जोसा य॥985॥
देख पुरुष होती विलीन इसलिए कहें उसको विलया ।
दुःख से योजित करे पुरुष को युवती और कहें योषा॥985॥
अन्वयार्थ : पुरुष के कंठ में अनर्थ को 'लयति' लीन करती है, इससे स्त्री को विलया कहते हैं और नर को दु:ख में योजयति/युक्त करती है, अत: इसको युवती तथा योषा कहते हैं ।
सदासुखदासजी