
अवलत्ति होदि जं से ण दंढ हिदयम्मि धिदिबलं अत्थि ।
कुम्मरणोपायं जं जणयदि तो उच्चदि हि कुमारी॥986॥
धैर्यरूप बल नहीं हृदय में अतः कहें उसको अबला ।
कुमरण का करती उपाय इसीलिए कुमारी उसे कहा॥986॥
अन्वयार्थ : स्त्रियों के प्रसंग से पुरुषों के हृदय में धैर्य का बल नष्ट होता है । इसकारण इसे अबला कहते हैं और पुरुषों के कुमरण का उपाय उत्पन्न करती है, इसकारण इसे कुमारी कहते हैं ।
सदासुखदासजी