
णासो अत्थस्स खओ देहस्स य दुग्गदीपमग्गो य ।
आवाहो य अणत्थस्स होइ पहुवो य दोसाणं॥990॥
धन-नाशक, तन क्षयकर अरु दुर्गति का है मार्ग कहा ।
है अनर्थ के लिए प्याऊ दोषोत्पत्ति स्थान कहा॥990॥
अन्वयार्थ : स्त्री अर्थ का नाश करने वाली है, क्योंकि जितना धन उपार्जन करते हैं, वह सभी स्त्री के मार्ग से नष्ट हो जाता है और स्त्री के राग से देह का भी नाश होता है । स्त्री ही नरकतिय र्ंच गति में जाने का मार्ग है, अनर्थ रूप जल आने का धोध/स्रोत है और दोषों को उत्पन्न करने वाली है ।
सदासुखदासजी