पं-सदासुखदासजी
पासो व बंधिदुं जे छेत्तुं महिला असीव पुरिसस्स ।
सिल्लं व विंधिदुं जे पंकोव निमज्जिदुं महिला॥992॥
बन्धन हेतु कहें पाश-सम छेदन को तलवार-समान ।
भाला-सम वह नर को बींधे डूबने हेतु है पंक-समान॥992॥
सदासुखदासजी