अग्गीवि य डहिदुं जे मदोव पुरिसस्स मुज्झिदुं महिला ।
महिला णिकत्तिदुं करकचोव कंडूव पडलेढुं॥994॥
अग्नि-समान जलाती नर को मदिरा-सम मदहोश करे ।
आरे-सम वह नर को काहे हलवाई जैसा तला करे॥994॥

  सदासुखदासजी