
चंदो हविज्ज उण्हो सीदो सूरो वि थड्डमागासं ।
ण य होज्ज अदोसा भद्दिया वि कुलबालिया महिला॥996॥
चन्द्र उष्ण हो रवि शीतल, नभ में कठोरता हो सकती ।
किन्तु कुलवती नारी भी निर्दाेष भद्र नहिं हो सकती॥996॥
अन्वयार्थ : कदाचित् चन्द्रमा उष्ण हो जाये, सूर्य शीतल हो जाये और आकाश कठोर हो जाये तो भी कुलवन्ती स्त्री भी दोष रहित नहीं होती और न सरल परिणामी होती है ।
सदासुखदासजी