वग्घादीणं दोसे णच्चा परिहरदि ते जहा पुरिसो ।
तह महिलाणं दोसे दठ्ठुं महिलाओ परिहरइ॥998॥
व्याघ्र आदि के दोष देखकर नर रहता है उससे दूर ।
त्यों नारी के दोष देखकर नर भी रहता उससे दूर॥998॥
अन्वयार्थ : स्त्रियों के दोषों को देख महान पुरुष इनका दूर ही से त्याग करते हैं ।

  सदासुखदासजी