महिलाणं जे दोसा ते पुरिसाणं पि हुंति णीचाणं ।
तत्तो अहियदरा वा तेसिं वलसत्तिजुत्ताणं॥999॥
नारी में जो दोष रहें वे नीच पुरुष में भी होते ।
बल-शक्तियुत नर में भी नारी से अधिक दोष होते॥999॥
अन्वयार्थ : जो दोष स्त्रियों के पूर्व में कहे, वे सभी दोष नीच पुरुषों में भी होते हैं अथवा बल की शक्ति युक्त जो पुरुष, उनमें स्त्रियों से भी अधिक दोष होते हैं ।

  सदासुखदासजी