
सीलवदीवो सुच्चंति महीयले पत्तपाडिहेराओ ।
सावाणुग्गहसमत्थाओ वि य काओ वि महिलाओ॥1004॥
देवों से भी सम्मानित कई शीलवती नारियाँ सुनीं ।
व्रत प्रभाव से शाप दे सकें या अनुग्रह से सक्षम थीं॥1004॥
अन्वयार्थ : इस लोक में शीलव्रत को धारण कर, पृथ्वी पर देवों द्वारा सिंहासनादि प्रातिहार्य को शील के प्रभाव से प्राप्त हुईं और शाप में, अनुग्रह में है शक्ति जिनकी, ऐसी भी कितनी ही स्त्रियाँ पृथ्वीतल पर हैं ही ।
सदासुखदासजी