पाहाणधादुअंजणपुढवितया छल्लिवल्लिमूलेहिं ।
मुहकेसवासतंबोल गंध मल्लेहिं धुवेहिं॥1052॥
रत्ननीर अंजन मिट्टी अरु त्वचा छाल अथवा जड़ से ।
केशवास गंधितमाला मुखवास पान धूपादिक से॥1052॥

  सदासुखदासजी