पंचेव य कोडीओ भवंति तह अठ्ठसठ्ठिलक्खाइं ।
णव णवदिं च सहस्सा पंचसया होंति चुलसीदी॥1061॥
पाँच करोड़-रु अड़सठ लाख और निन्यानवे हजार कहे ।
तथा पाँच सौ चौरासी हैं इस तन में कुल रोग अरे॥1061॥
अन्वयार्थ : जब एक अंगुल में छियानवे रोग होते हैं तो सम्पूर्ण देह में कितने रोग होंगे? पाँच करोड अडसठ लाख निन्यानवे हजार पाँच सौ चौरासी रोग इस देह में उत्पन्न होने योग्य हैं । इसप्रकार तीन गाथाओं में रोगों का वर्णन किया ।

  सदासुखदासजी