पं-सदासुखदासजी
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अब संयोग की अध्रुवता भी दो गाथाओं में दिखाते हैं-
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मरदि सयं वा पुव्वं सा वा पुव्वं मदिज्ज से कंता ।
जीवंतस्स व सा जीवंती हरिज्ज बलिएहिं॥1064॥
पुरुष स्वयं पहले मर जाये या पत्नी पहले मरती ।
पति जीवित हो किन्तु अन्य बलवानों से अपहृत होती॥1064॥
सदासुखदासजी