
मेघहिमफेणउक्कासंझाजल बुब्बुदो व मणुगाणं ।
इंदिय जोव्वणमदिरूवतेयबलवीरियमणिच्चं॥1067॥
इन्द्रिय यौवनरूप तेज बल बुद्धि एवं वीर्य सभी ।
मेघ फेन उल्का सन्ध्या जल बुलबुल फेन समान अनित्य॥1067॥
अन्वयार्थ : मनुष्यों की इन्द्रियाँ, यौवन, मति, रूप, तेज, बल, वीर्य - ये सभी मेघ तथा ओस के जल तथा फेन/झाग, बिजली तथा संध्या की रक्तता/लालिमा एवं जल के बुद्बुदे समान अनित्य हैं - विनाशीक हैं ।
सदासुखदासजी