
वज्झो य णिज्जमाणो जह पियइ सुरं व खादि तंबोलं ।
कालेण य णिज्जंता विसए सेवंति तह मूढा॥1069॥
वध के लिए नियत कोई नर मदिरा पिये पान खाये ।
वैसे मूढ़ मृत्यु से हो निश्चिन्त विषय सेवन करते॥1069॥
अन्वयार्थ : जैसे किसी को मारने को ले जायें और वह पुरुष मदिरा पिये, तांबूल/पान खाये, तैसे ही काल से ले गये/मरण के सन्मुख मूढ को उसका भय नहीं, लज्जा नहीं, वह विषयसेवन करता है ।
सदासुखदासजी