तह चेव मच्चुवग्धपरद्धो बहुदुक्खसप्पबहुलम्मि ।
संसारबिले पडिदो आसामूलम्मि संलग्गो॥1071॥
मृत्यु व्याघ्र से पीड़ित प्राणी दुख सपाब से भरे हुए ।
पड़ा हुआ भव-कूप मध्य में आशा-जड़ को है पकड़े॥1071॥

  सदासुखदासजी