+ अब वृद्ध सेवा नामक ब्रह्मचर्य का अधिकार पंद्रह गाथाओं में कहते हैं- -
थेरा वा तरुणा का वुड्ढा सीलेहिं होंति वुड्ढीहिं ।
थेरा वा तरुणा वा तरुणा सीलेहिं तरुणेहिं॥1077॥
वय से होवे वृद्ध-तरुण शीलादिक गुण यदि बढ़े हुए ।
तो वह वृद्ध, किन्तु शील हो तरुण यदि तो तरुण कहें॥1077॥
अन्वयार्थ : अवस्था से वृद्ध हो या तरुण, तरुणशील जो हास्य, काम की अधिकता, कषायों की प्रबलता और भोजनादि कथाओं में राग होने से पुरुष तरुण होता है ।

  सदासुखदासजी