
खोभेदि पत्थरो जह दहे पडंतो पसण्णमवि पंकं ।
खोभेइ तहा मोहं पसण्णमवि तरुणासंसग्गी॥1079॥
ज्यों तलाब में पत्थर गिरकर निर्मल जल को मलिन करे ।
वैसे तरुणों का संसर्ग प्रशान्त पुरुष को भी मोहे॥1079॥
अन्वयार्थ : जैसे जल के सरोवर में पत्थर फेंकने से प्रशान्त/निस्तरंग जल में दबा हुआ कीचड भी 'क्षोभयति' जल के ऊपर आकर जल को मलिन करता है, तैसे ही तरुण पुरुष की संगति पाकर दबा हुआ मोह भी उदय को प्राप्त होता है ।
सदासुखदासजी