पुरिसस्स अप्पसत्थो भावो तिहिं कारणेहिं संभवइ ।
वियरम्मि अंधयारे कुसीलसेवाए ससमक्खं॥1087॥
नर-नारी में तीन कारणों से हो कामुकता का भाव ।
हो एकान्त और अँधेरा, लखें अन्य का काम विलास॥1087॥
अन्वयार्थ : पुरुष के परिणाम तीन कारणों से अप्रशस्त/पाप रूप होते हैं - खराब होते हैं, एक तो अकेले स्त्रियों में रहने से, अन्धकार में गमनादि से और कुशीलों की संगति से तो प्रत्यक्ष में ही बिगडते हैं ।

  सदासुखदासजी