पासिय सुच्चा व सुरं पिज्जंतं सुंडओ भिलसदि जहा ।
विसए य तह समोहा पासिय सोच्चा व भिलसइ॥1088॥
यथा शराबी किसी अन्य को पीते देखे और सुने ।
वैसे मोही विषयों को लख - सुनकर उनकी चाह करे॥1088॥
अन्वयार्थ : जैसे मद्यपायी मद्य को पीते देखकर, सुनकर मद्य पीने की अभिलाषा करता है, तैसे ही मोही पुरुष विषयों को देखकर तथा काम-भोगरूप हास्य इत्यादि विषयों को सुनकर, विषयों की अभिलाषा करता है ।

  सदासुखदासजी