
जादो खु चारुदत्तो गोट्ठीदोसेण तह विणीदो वि ।
गणियासत्तो मज्जासत्तो कुलदूसओ य तहा॥1089॥
चारुदत्त श्रेष्ठी कुसंग से गणिका में आसक्त हुआ ।
मद्यपान में रत होकर निज कुल में दोष लगाया था॥1089॥
अन्वयार्थ : महाविनयवान चारुदत्त नामक श्रेष्ठी भी संगति के दोष से गणिका/वेश्या में आसक्त हो गया और मद्य में भी आसक्त हो गया । अपने कुल को कलंकित करने वाला हुआ ।
सदासुखदासजी