
तरुणस्स वि वेरग्गं पण्हाविज्जदि णरस्स बुढ्ढेहिं ।
पण्हाविज्जइ पाडच्छीवि हु वच्छस्स फरुसेण॥1090॥
ज्यों बछड़े के छूने से गो-स्तन में आ जाता है दूध ।
त्यों वृद्धों की संगति से तरुणों को हो जाता वैराग्य॥1090॥
अन्वयार्थ : ज्ञान, विनय, तप से जो वृद्ध पुरुष हैं, वे तरुण पुरुष को भी वैराग्य उत्पन्न कराते हैं । जैसे वत्स/बछडे के स्पर्श से गाय का दूध झरने लगे, ऐसा कर देता है ।
सदासुखदासजी