ठिदिगदिविलासविब्भमसहासचेट्ठि दकडक्खदिट्ठीहिं ।
लीलाजुदिरदि सम्मेलणोवयारेहिं इत्थीणं॥1096॥
नारी की स्थिति गति नेत्र-कटाक्ष हास्य, चेष्टा, शोभा ।
क्रीड़ा कान्ति, साथ में चलना और बैठना आदि कार्य॥1096॥

  सदासुखदासजी