
ठाणगदिपेच्छिदुल्लावादी सव्वेसिमेव इत्थीणं ।
सविलासा चेव सदा पुरिसस्स मणोहरा हुंति॥1098॥
खड़ी रहे, सविलास गमन करती, अथवा देखे बोले ।
नारी के सब कार्य-कलाप सदा पुरुषों का मन हरते॥1098॥
अन्वयार्थ : स्त्री का विलास सहित स्थान, गति अवलोकन, वचनालाप आदि सभी पुरुष के मन को सदा हर लेते हैं ।
सदासुखदासजी