रुद्दो परासरो सच्चईय रायरिसि देवपुत्तो य ।
महिलारूवालोई णट्ठा संसत्तदिट्ठीए॥1108॥
पाराशर ऋषि मुनि सात्यकि देवपुत्र, राजर्षि, रुद्र ।
रूप देखने में नारी का भ्रष्ट हुए होकर आसक्त॥1108॥
अन्वयार्थ : रुद्र, पाराशर, सात्यकी, राजर्षि तथा देवपुत्र - ये महान ॠषि स्त्री का रूप देखने में आसक्ति करने मात्र से नष्ट हुए हैं ।

  सदासुखदासजी