
ते अदिसूरा जे ते विलाससलिलमदिचवलरदिवेगं ।
जोव्वणणईसु तिण्णा ण य गहिया इच्छिगाहेहिं॥1119॥
है विलास जल, चंचल रति है वेगरूप यौवन सरिता ।
नारी मगरमच्छ से बचकर तैरे वह अति शूर कहा॥1119॥
अन्वयार्थ : जगत में वे अति शूरवीर हैं, जो यौवनरूपी नदी से पार उतर गये हैं और यौवनरूपी नदी में स्त्रीरूपी महाग्राह/मत्स्य उनसे ग्रहण नहीं किये गये हैं । कैसी है यौवनरूपी नदी? विलासरूपी है जल जिसमें और अति चपल रतिरूपी वेग है जिसमें ।
सदासुखदासजी