अन्वयार्थ : - धान्य उत्पन्न होने का [[क्षेत्र]]
- रहने योग्य जगह तथा अन्य मकान, उन्हें [[वास्तु]] कहते हैं
- सोना, चाँदी, रुपया, मुहर इत्यादि को [[धन]] कहते हैं
- चावल, गेहूँ, जौ इत्यादि [[धान्य]] होते हैं
- वस्त्रादि [[कुप्य]] हैं
- कुंकुम, कर्पूर, मिर्च, हिंग्वादिक [[भांड]] हैं
- दासी, दास तथा अन्य सेवकादि का समूह [[द्विपद]] है
- हस्ती, घोडा, बैल इत्यादि [[चतुष्पद]] हैं
- पालकी, विमान इत्यादि [[यान]] हैं
- शय्या-पर्यंकादि और सिंहासनादि [[आसन]] हैं
ये दस प्रकार के बाह्य ग्रन्थ हैं । बाह्य परिग्रह के परित्याग बिना आत्मा के दर्शन, ज्ञान, चारित्र, वीर्य, अव्याबाधसुख इत्यादि गुणों के घात करने वाले मोहमल का अभाव नहीं होता ।