देसामासियसुत्तं आचेलक्कंति तंखु ठिदिकप्पे ।
लुत्तोत्थ आदिसद्दो जह तालपलंबसुत्तम्मि॥1130॥
अचेलक्य स्थितिकल्प में देशामर्शक1 सूत्र कहा ।
आदि शब्द है लुप्त यथा ताल प्रलम्ब सूत्र में भी॥1130॥
अन्वयार्थ : आचारांग के स्थितिकल्प नामक अधिकार में जो अचेलक्य पद कहा है, वह देशामर्षिक सूत्र है । (आचेलक्य शब्द की निरुक्ति करते समय "न चेलम् इति अचेलं तस्य भाव: आचेलक्यम्" है । इसमें चेल शब्द उपलक्षण रूप है ।) इससे वस्त्रमात्र का ही त्याग नहीं जानना, वस्त्र से लेकर सभी आभूषण वस्त्र-शस्त्रादि परिग्रह का त्याग जानना । यहाँ कोई कहे, अचेलक्यादि इसप्रकार 'आदि' शब्द सूत्र में क्यों नहीं कहा? वह तो वहाँ आदि पद का लोप व्याकरण में हो जाता है । जैसे ताल-प्रलम्बादि में आदि शब्द का लोप हो गया है, तैसे ही यहाँ आदि शब्द का लोप जानना ।

  सदासुखदासजी