दूओ बंभण वग्घो लोओ हत्थी य तह य रीयसुयं ।
परियणरो वि य राया सुवण्णरयणस्स अक्खाणं॥1138॥
दूत व्याघ्र ब्राह्मण हस्ती अरु लोक राज-युत की वार्ता ।
पथिक पुरुष एवं राजा की कथा सुनाई श्रावक ने॥1138॥

  सदासुखदासजी