
सेवइ णियादि रक्खइ गोमहिसिमजावियं हयं हत्थिं ।
ववहरदि कुणदि सिप्पं अहो य रत्ती य गयणिद्दो॥1142॥
नीच पुरुष की करे नौकरी गाय भैंस बकरी पाले ।
सोये नहिं, परदेश बसे अरु शिल्प करे परिग्रह लोभी॥1142॥
अन्वयार्थ : धन के लिये गायों की, भैसों की, बकरी की, मींढा की, घोडा की तथा हाथियों की रक्षा करता है, चाकरी करता है तथा पशुओं का व्यापार करता है । रात-दिन शिल्पकर्म करता है, रात्रि में निद्रा भी नहीं लेता है ।
सदासुखदासजी