गंथणिमित्तं घोरं परितावं पाविदूण कंपिल्ले ।
लल्लक्कं संपत्तो णिरयं पिण्णागगंधो खु॥1147॥
नगर कंपिला में पिण्याक गन्ध नाम का पुरुष हुआ ।
परिग्रह हेतु घोर दुख सह, लल्लक बिल में जन्म लिया॥1147॥
अन्वयार्थ : कांपिल्य नगर में पिण्याकगन्ध नामक पुरुष परिग्रह के लिये महान संताप पाकर लल्लक नामक नरक को प्राप्त हुआ ।

  सदासुखदासजी