मादुपिदुपुत्तदारेसु वि पुरिसो ण उवयाइ वीसंभं ।
गंथणिमित्तं जग्गइ रक्खंतो सव्वरत्तीए॥1154॥
माता-पिता पुत्र अरु पत्नी का भी करे न नर विश्वास ।
परिग्रह की रखवाली करता दिन भर और रात भर जाग॥1154॥
अन्वयार्थ : यह पुरुष परिग्रह के लिए माता का, पिता का, पुत्र का, स्त्री का भी विश्वास नहीं करता है । यद्यपि ये माता, पिता, पुत्र, स्त्री विश्वास करने योग्य हैं, तथापि पूरी रात परिग्रह की रक्षा करने के लिये जागता रहता है ।

  सदासुखदासजी