पं-सदासुखदासजी
+
है और चोर-लुटेरों के भय से उत्पथ मार्ग/गुप्त या ऊबड-खाबड मार्ग से भागता है, जल के द्रह -
-
संगणिमित्तं कुद्धो कलहं रोलं करिज्ज वेरं वा ।
पहणेज्ज व मारेज्ज व मारिजेज्ज व तह य हम्मेज्ज॥1160॥
परिग्रह के कारण ही यह नर क्रोध कलह या बैर करे ।
करे बहस अरु मारपीट या स्वयं पिटे या मर जाये॥1160॥
सदासुखदासजी