आदाणे णिक्खेवे सरेमणे चावि तेसिं गंथाणं ।
उक्कस्सणे वेक्कसणे फालणपप्फोडणे चेव॥1166॥
जब परिग्रह का ग्रहण करें संस्कार करें अन्यत्र रखें ।
बाहर ले जायें या उसके बन्धन खोलें या फाड़ें॥1166॥

  सदासुखदासजी