छेदणबंधणवेढण - आदावणधोव्वणादिकिरियासु ।
संघट्टणपरिदावणहणणादी होदि जीवाणं॥1167॥
झाड़ें छेदें ढाँके और सुखायें अथवा धोए मलें ।
इत्यादिक कायाब में निश्चित बहु जीवों का घात करें॥1167॥

  सदासुखदासजी