
एदेसिं दोसाणं मुंचइ गंथजहणेण सव्वेसिं ।
तव्विवरीया य गुणा लभदि य गंथस्स जहणेण॥1174॥
परिग्रह का परित्याग करें तो ये सब दोष नहीं होते ।
पर इनके विपरीत बहुत गुण हों परिग्रह को तजने से॥1174॥
अन्वयार्थ : परिग्रह का त्याग करने से इतने सभी दोषों का त्याग हो जाता है । उन दोषों से उलटे गुणों को धारण करता है/प्राप्त होता है ।
सदासुखदासजी