तह्मा सव्वे संगे अणागए वड्ढमाणए तीदे ।
तं सव्वत्थ णिवारहि करणकारावणाणुमोदेहिं॥1186॥
अतः अतीत अनागत एवं वर्तमान सब परिग्रह का ।
करना और कराना अनुमोदन से त्याग करो सबका॥1186॥
अन्वयार्थ : इसलिए भो ज्ञानी! तुम भविष्य में होगा, वर्तमान में है तथा भूत में हो गया है, ऐसे सम्पूर्ण परिग्रह का कृत-कारित-अनुमोदना से निवारण/सर्वथा त्याग करो । जो परिग्रह चला गया, उसे याद मत करो । आगे की वांछा मत करो और जो वर्तमान में है, उसमें राग मत करो ।

  सदासुखदासजी