+ अब भाषासमिति का वर्णन करते हैं - -
सच्चं असच्चमोसं अलियादीदोसवज्जमणवज्जं ।
वदमाणस्सणुवीची भासासमिदी हवदि सुद्धा॥1200॥
असत्यादि दोषों से विरहित, पाप रहित, सूत्र अनुसार ।
सत्य तथा अनुभय भाषी को भाषा समिति कहें जिनराज॥1200॥
अन्वयार्थ : लोक में वचन चार प्रकार के हैं- सत्य, असत्य, उभय और अनुभय । उनमें से असत्य और उभय - इन दो प्रकार के वचनों का त्याग करके सत्य और अनुभय - इन दो प्रकार के वचनों को सूत्र के अनुकूल बोलने वाले पुरुष के शुद्ध भाषासमिति होती है । कैसे हैं सत्य और अनुभय वचन? असत्यादि दोष रहित हैं और पापरहित हैं, इसलिए दो वचन ही श्रेष्ठ हैं ।

  सदासुखदासजी