पं-सदासुखदासजी
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अब आमंत्रणादि अनुभयवचन के नौ भेद कहते हैं -
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आमंतणि आणवणी जायणि संपुच्छणी य पण्णवणी ।
पच्चक्खाणी भासा भासा इच्छाणुलोभा य॥1203॥
आमन्त्रणी याचना-आज्ञा-संपृच्छा-प्रज्ञापन रूप ।
प्रत्याख्यानी वचन जानिए अरु इच्छा-अनुलोम स्वरूप॥1203॥
सदासुखदासजी