
एदेण चेव पदिठ्ठावणसमिदीवि वण्णियसा होदि ।
वोसरणिज्जं दव्वं थंडिल्ले वोसरिंतस्स॥1207॥
इसके वर्णन से ही होता प्रतिष्ठापना समिति कथन ।
मल-मूत्रादिक प्रासुक भू पर तजे उसे यह समिति महान॥1207॥
अन्वयार्थ : इस आदाननिक्षेपण समिति का वर्णन करने के बाद ही प्रतिष्ठापना नामक समिति का वर्णन होता है । स्थंडिल भूमि जो निर्जंतु, प्रासुक, छिद्ररहित, उद्योतरूप क्षेत्र में मल, मूत्र, कफ, केश, नखों का क्षेपण करना, मुनियों के यह प्रतिष्ठापना समिति होती है ।
सदासुखदासजी