+ अब सत्यमहाव्रत की पाँच भावनाएँ कहते हैं - -
कोधभयलोभहस्सपदिण्णा अणुवीचिभासणं चेव ।
विदियस्स भावणाओ वदस्स पंचेव ता होंति॥1215॥
क्रोध-लोभ-भय-हास्य त्याग एवं सूत्रानुसार भाषण ।
ये पाँचों भावना सत्यव्रत की हैं कहते श्री जिनराज॥1215॥
अन्वयार्थ : जो सत्यमहाव्रत धारण करते हैं, उन्हें क्रोध का, भय का, लोभ का तथा हास्य का त्याग करना और सूत्र के अनुसार वचन बोलना योग्य है ।

  सदासुखदासजी