
णिस्सल्लस्सेव पुणो महव्वदाइं हवंति सव्वाइं ।
वदमुवहम्मदि तीहिं दु णिदाणमिच्छत्तमायाहिं॥1222॥
जो निःशल्य हैं उन जीवों के सभी महाव्रत होते हैं ।
शल्य तीन मिथ्या निदान अरु माया, व्रत की घातक हैं॥1222॥
अन्वयार्थ : क्योंकि शल्य रहित के ही सकल महाव्रत होते हैं और माया, मिथ्यात्व, निदान
सदासुखदासजी