कुद्धो वि अप्पसत्थं मरणे पच्छेइ परवधादीयं ।
जह उग्गसेणघादे कदं णिदाणं वसिठ्ठेण॥1226॥
मरते समय क्रोध वश किसी अन्य का वध करना चाहे ।
उग्रसेन का घात करूँ मैं किया निदान वशिष्ठ ऋषि ने॥1226॥
अन्वयार्थ : जो मरण काल में क्रोधी हो और पर के मरणादि की वांछा करता है, उसके अप्रशस्तनिदान होता है । जैसे वसिष्ठ नामक मुनि ने उग्रसेन राजा को मारने के लिये निदान किया ।

  सदासुखदासजी