
भोगा चिंतेदव्वा किंपाकफलोवमा कड्डविवागा ।
महुरा व भुंजमाणा मज्झे बहुदुक्खभयपउरा॥1249॥
विषय भोग किंपाक फलोपम कटु विपाक हैं चिन्तन योग्य ।
भोग समय तो मधुर लगें फिर बहु दुःख और अधिक भय हो॥1249॥
अन्वयार्थ : इन इन्द्रियों के भोग किंपाक-फल के समान भोगने में मिष्ट हैं और परिपाक समय में अति कडवे हैं । कैसे हैं भोग? बहुत दु:ख और भयकारी होने से प्रचण्ड/तीव्र हैं ।
सदासुखदासजी