आयरियसत्थवाहेण णिज्जउत्तेण सारविज्जंतो ।
सो साहुवग्गसत्थो संसारमहाडविं तरइ॥1298॥
सावधान आचार्य सुचालक से संबोधित बारम्बार ।
आराधक वह साधु वर्ग संसार महावन करता पार॥1298॥

  सदासुखदासजी