
पंथं छंडिय सो जादि साधुसत्थस्स चेव पासाओ ।
जो पडिसेवदि पासत्थसेवणाओ हु णिद्धम्मो॥1307॥
साधु संघ का मार्ग छोड़कर जाए एेसे मुनि के पास ।
जो चारित से भ्रष्ट हुआ आचरण करे मुनि का पार्श्वस्थ॥1307॥
अन्वयार्थ : जो साधु वर्ग के पथ को छोडकर चारित्र की विराधना करता है, वह पार्श्वस्थ का सेवन करने वाला धर्मरहित है ।
सदासुखदासजी