+ अब यथाछंदजाति के भ्रष्ट मुनि का स्वरूप कहते हैं - -
सिद्धिपुरमुवल्लीणा वि केेइ इंदियकसाय चोरेहिं ।
पविलुत्तचरणभंडा उवहदमाणाट्ट णिवद्दंति॥1316॥
शिवपुर निकट पहँुचकर भी इन्द्रिय कषाय चोर लूटें ।
उनका चारित धन जिससे वे मान छोड़1 वापस लौटे॥1316॥

  सदासुखदासजी