पं-सदासुखदासजी
कलभो गएण पंकादुद्धरिदो दुत्तरादु बलिएण ।
सयमेव पुणो पंकं जलतण्हाए जह अदीदि॥1329॥
ज्यों कीचड़ में फँसा हस्तिसुत बलशाली हाथी द्वारा ।
गया निकाला, किन्तु प्यास वश वह कीचड़ में फँस जाता॥1329॥
सदासुखदासजी